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आज फजाँ में कुछ तपिश सी है
अखबार में मौसम का समाचार देखो..
इक झोपडपट्टी जलकर राख हुई
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ऑंखों में सूनापन.. चेहरा गुमशुदा सा..
उसे किसी चीज की अब हसरत नहीं है
जिंदगी में उस ने बहुत कुछ खोया होगा
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मिट्टी की सडक डामर की हो चुकी है
गाँव की शक्ल अब शहर की हो चुकी है !
-मेरे बचपन की निशानियां भी खो चुकी है !
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मेरी जिंदगी है आम दायरे के बाहर
मेरा घर भी है शहर से अलग-थलग
आम राह-मकानों में क्यूं मै क़ैद हो जाउं?
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अजनबी लगने लगी है गलियां.. शहर अनजाना सा..
वक्त के साथ साथ सब कुछ बदल गया शायद !
और हम ही एक पिछले मोड पे रुके हुये है कब से!!
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सारे दिन एक समान, फिर भी कुछ खास
त्यौहार है, त्यौहार का जश्न मनाया जायें!
(-लोग सिर्फ त्यौहार मनाते है, धरम निभाते नहीं!!)
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पुराने गाने
नये गाने
रिमिक्स गाने!
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पीछे कुछ छुटा है.. आगे कोई उम्मीद है..
रास्ते में हुं, हर पल यहीं मंजर हैं
थक गया हुं, अब कोई तो मुकाम आये..
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घर से भाग चला हूँ..
सफर पे निकला हूँ..
(काश, लौटना न पड़े)
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हिंदुस्तान
पाकिस्तान
बांग्लादेश!
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इन दिनों सभी को मुझ से एक शिकायत है -
इन दिनों कुछ कहा-सुना नहीं, कुछ लिखा भी नहीं
- वक्त पहले जैसा ही होता तो अलग बात होती!
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कुछ मांगा था हम ने, आप से.. खुदा से.. जमाने से..
कुछ हसरत ही रही मगर कुछ मुझे मिला भी हैं
फिर मेरे फितरत में फकत यह नाराजगी क्यों?
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कुछ मांगा था हम ने, आप से.. खुदा से.. जमाने से..
हकीकत तो यह है कि हथेली खुली भी है और खाली भी
याद नहीं - सब कुछ खो दिया या कुछ पाया ही नहीं
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- संदीप मसहूर